परीक्षोपयोगी अति महत्वपूर्ण विद्रोह, वर्ष एवं उनके क्षेत्र
परीक्षोपयोगी अति महत्वपूर्ण विद्रोह, वर्ष एवं उनके क्षेत्र
संयासी विद्रोह (1763-1800 ई.) - यह विद्रोह बिहार और बंगाल के क्षेत्र में हुआ था। केना सरकार इसके प्रमुख नेता थे। बंकिम चन्द्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनन्दमठ’ में इस विद्रोह का उल्लेख है।
फकीर विद्रोह (1776-77 ई.) - इस विद्रोह का नेतृत्वकर्ता मजनूशाह था। इसका क्षेत्र बंगाल था।
चुआर विद्रोह (1766-1816 ई.) - इस विद्रोह का नेतृत्वकर्ता जगन्नाथ था। इसका क्षेत्र बंगाल और बिहार था। भू-राजस्व में वृद्धि इसका प्रमुख कारण था।
रामोसी विद्रोह (1822-1829 ई.) - इस विद्रोह का नेता चित्तुर सिंह तथा क्षेत्र पश्चिमी घाट था।
पागलपंथी विद्रोह (1825-1827 ई.) - इस विद्रोह का नेता टीपूशाह तथा क्षेत्र असम था।
कोल विद्रोह (1831-1832 ई.) - इस विद्रोह का नेता बुधु भगत तथा क्षेत्र राँची, सिंहभूम, हजारी बाग, पलामू था।
संथाल विद्रोह (1855-1856 ई.) - यह एक आदिवासी विद्रोह था। इस विद्रोह के प्रमुख नेता सिद्धू तथा कान्हू थे। इसका क्षेत्र भागलपुर से राजमहल पहाड़ियों के बीच था।
नील विद्रोह (1859-60 ई.) -दीनबन्धु मिश्र के उपन्यास ‘नील दर्पण ‘ में इस विद्रोह का वर्णन है। इसके प्रमुख नेता तिरूत सिंह तथा क्षेत्र बंगाल एवं बिहार था।
पाबना विद्रोह (1873-76 ई.) - इस विद्रोह के प्रमुख नेता ईशानचन्द्र राय एवं शंभूपाल तथा इसका क्षेत्र पाबन (बंगाल ) था।
मुंडा विद्रोह (1893-1900 ई.)- इस विद्रोह के प्रमुख नेता बिरसा मुंडा थे। यह खुँटकट्टी प्रथा के विरोध में झारखण्ड में प्रारम्भ हुआ था। मुंडा विद्रोह को ‘सरदारी लड़ाई’ के नाम से भी जाना जाता है। 1895 में बिरसा ने अपने आपको ‘भगवान का दूत’ घोषित किया था। मुंडा विद्रोह को उल्गुलान (महान हलचल) के नाम से भी जाना जाता है। बिरसा मुंडा के आध्यात्मिक गुरु आनंद पनरे (वैष्णव मत के) माने जाते हैं। बेस्ट स्टडी चैनल- स्टडी फॉर सिविल सर्विसेज
ताना भगत आन्दोलन (1914-15 ई.)-इस आन्दोलन के प्रमुख नेता जतरा भगत तथा बलराम भगत थे। इसका क्षेत्र छोटानागपुर था।
मोपला विद्रोह (1921-22 ई.)- इस विद्रोह के प्रमुख नेता अली मुसलियार तथा क्षेत्र मालाबार था। यहां पर काश्तकार अधिकतर बटाईदार मुसलमान थे तथा जमींदार अधिकतर हिंदू थे। मालाबार में मोपला विद्रोह खिलाफत आन्दोलन का परिणाम था।
तेभागा आन्दोलन (1946 ई.) -इस आन्दोलन के प्रमुख नेता कम्पाराम तथा भवन सिंह थे। इसका क्षेत्र बंगाल था।
हौज विद्रोह (1820-1821 ई.)-हौज विद्रोह का केंद्र बिहार का संथाल परगना था।
भील विद्रोह (1812-1819)-भीलों की आदिम जाति पश्चिमी तट के खानादेश में रहती थी। 1812-1819 तक इन लोगों ने अपने नए स्वामी अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
अहोम विद्रोह (1828 ई.)-इसके नेता गोमधर कुंवर थे।
ताना भगत आन्दोलन (1914 ई.)- ताना भगत आन्दोलन का प्रारंभ उरांव आदिवासियों के मध्य वर्ष 1914 में छोटानागपुर में हुआ था। इस आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता जतरा भगत, बलराम भगत तथा देवमेनिया भगत आदि थे।
खैरवार आदिवासी आन्दोलन (1874 ई.)-खैरवार आदिवासी आन्दोलन भागीरथ मांझी के नेतृत्व में 1874 में हुआ था। संभलपुर की गद्दी के दावेदार सुरेंद्र साई ने यहां ब्रिटिश विरोधी आन्दोलन का नेतृत्व किया।
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